Low
Machine & Manual
Manual
Low
Medium
5.5PH to 7.0 PH
30 -35 °C
20 KG/ Acre NPK, Uria 20 KG/ Acre
Basic Info
Seed Specification
Land Preparation & Soil Health
Crop Spray & fertilizer Specification
Weeding & Irrigation
Harvesting & Storage
Description:
मौसम के खुलते ही सोयाबीन, मूंग व उड़द में पीला मोजेेक रोग की सम्भावना है।कृषि वैज्ञानिकों की सलाह है कि पीले पड़ रहे पौधों को शुरूआत में ही उखाड़ कर फैंक दें, ताकि बाकी फसल को यलो मोजेक बीमारी से बचाया जा सके।
Organic Solution:
पीला मोजाइक वायरस फैलाने वाली सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए बीज को थायोमिथोक्साम 30 एफ.एस. से 3 ग्राम अथवा इमिडाक्लोप्रिड एफ.एस. 1.25 मिलीलीटर प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें।
Chemical solution:
फसल पर सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए बीज को थायोमिथोक्साम 25 डब्ल्यू.जी. का 100 ग्राम को 500 लीटर पानी में घोल कर/ हे. की दर से छिड़काव करें।
Description:
बैक्टीरियल ब्लाइट Pseudomonas savastanoi pv के कारण होता है। ग्लाइसिनिया, और आमतौर पर सोयाबीन पर होने वाले पहले पर्ण रोगों में से एक है। बैक्टीरियल ब्लाइट शायद ही कभी गंभीर उपज नुकसान का कारण बनता है।
Organic Solution:
इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए कॉपर फफूंदनाशकों की सिफारिश की जाती है
Chemical solution:
सोयाबीन पर बैक्टीरियल ब्लाइट के नियंत्रण के लिए कॉपर फफूंदनाशकों का उपयोग किया जा सकता है लेकिन इसे प्रभावी होने के लिए रोग चक्र में जल्दी लगाने की आवश्यकता होती है। हालांकि, कोर एकीकृत कीट प्रबंधन प्रथाओं का पालन करने की सिफारिश की जाती है क्योंकि कवकनाशी अक्सर इस रोगज़नक़ के खिलाफ प्रभावी नहीं होते हैं।
Description:
बैक्टीरियल pustule Xanthomonas axonopodis pv के कारण होता है। यह रोग मध्य से देर के मौसम में होता है जब तापमान गर्म होता है। रोग विकास गर्म, गीले मौसम के अनुकूल है।
Organic Solution:
इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए कॉपर फफूंदनाशकों की सिफारिश की जाती है |
Chemical solution:
रोग के प्रारंभिक चरण में तांबा आधारित कवकनाशी (उदाहरण के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड, 3 जी / एल पानी) लागू करें।
Description:
ब्राउन स्टेम रोट कवक कैफोफोरा ग्रेगाटा (Cadophora gregata) के कारण होता है। ब्राउन स्टेम रोट अधिक गंभीर होता है जब तापमान ठंडा होता है और मिट्टी की नमी मौजूद होती है। गैर-मेजबान फसल (मकई, छोटे अनाज, और चारा फलियां) के लिए फसल का रोटेशन रोगज़नक़ के स्तर को कम करेगा।
Organic Solution:
सहिष्णु और प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग |
फसल चक्रण का पालन किया जाना चाहिए।
पिछली फसल अवशेष नष्ट हो जाना चाहिए।
फसल अवशेषों को निकालना।
Chemical solution:
2 किलो / हेक्टेयर पर मैनकोजेब का छिड़काव करें।
Description:
Organic Solution:
खेत में ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई करें एवं नियमित रूप से खरपतवार प्रबंधन करें। समय से पूर्व बुवाई करने पर कीट का प्रकोप अधिक होता है। अतः बुवाई समय से जुलाई माह में करें। फसल में खाद्य एवं उर्वरक का प्रयोग समय से करें एवं पोटाश की मात्रा अवश्य डालें। प्रभावित पौधे को नीचे से तोड़कर नष्ट कर दें। रोग रोधी किस्में जैसे-जे.एस. 93-05, जे.एस 71-05 का प्रयोग करें। खेत के चारों ओर ढेंचा लगाए जो कि कीटों को अपनी तरफ आकर्षित करके फसल को होने वाले नुकसान से बचाती है।
Chemical solution:
रासायनिक नियंत्रण हेतु ट्राइजोफास 800 मिली प्रति हेक्टेयर या लैम्बडासायहैलोथरीन 4-9 सी .एस. का 300 एम. एल. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
Description:
तना मक्खी कीट का वैज्ञानिक नाम 'मेलेनोग्रोमाइजा फेजियोलाइ' है। ये मक्खी अण्डे पत्ती की निचली सतह पर देती है। ये अण्डे पीले, सफेद रंग के होते हैं। मादा का रंग भूरा, काला होता है।
Organic Solution:
उचित समय में बुवाई करें। देरी से फसल में कीट का प्रकोप बढ़ जाता है। समुचित मात्रा में खाद एवं उर्वरक का प्रयोग चाहिए। अनुशंसित बीज दर का प्रयोग करें। प्रकोपित पौधे को उखाड़ कर नष्ट कर दें। एक ही खेती में लगातार सोयाबीन की फसल नहीं लें। जैविक नियंत्रण के लिए प्रेयिंग मेटेड क्राइसोपरला, क्राक्सीनेल वीटिल को फसल में छोड दें। रोगरोधी जातियां जे.एस. 93-05, जे.एस. 71-05 लगाएँ।
Chemical solution:
इमीडाक्लोप्रिड 17.08 एस.एल. 5 मि.ली. प्रति कि.ग्रा. से बीजोपचार करें। भूमि उपचार हेतु फोरेट 10 जी, 10 किलो प्रति हेक्टे. या कार्बोफ्यूरान 3 जी का 30 किलो प्रति हेक्ट. की दर से प्रयोग करें। इसके अतिरिक्त डाईमेथोएट 30 ई.सी. 700 मिली. या इमाडाक्लोप्रिड 200 मिली. प्रति हेक्टे. की दर से छिड़काव करें।
Description:
Organic Solution:
यदि 1 मीटर की पौध कतार में दो या दो से अधिक इल्ली दिखाई दे तो इसका नियंत्रण करना आवश्यक हो जाता है। इसके लिए उचित बीज दर का प्रयोग करें क्योंकि यदि पौधों के बीच की दूरी नियंत्रित होगी तो इस कीट का प्रकोप कम होगा। उचित खरपतवार प्रबंधन करें। खेत में "टी आकार" की लकड़ी की खूंटियां लगाएं जिसमें बैठने वाली चिड़ियां इन इल्लियों को खा सकें। फेरोमोन ट्रैप 10 ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से खेतों में लगाएँ। प्रकाश प्रपंचों का प्रयोग करें।
Chemical solution:
इल्लियों का प्रकोप ज्यादा हो जाए तो रासायनिक दवाओं का प्रयोग करें, जैसे-फसल के 30 से 35 दिन की अवस्था में क्विनालफास 2 मिली. प्रति लीटर पानी की दर से 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर दवा का छिड़काव करें या ट्राइजोफास 800 मिली. प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करें।
Description:
Organic Solution:
नियमित फसल चक्र अपनाएं एवं अनुशंसित बीज की मात्रा उपयोग करें। फेरोमोन ट्रेप 10-12 प्रति हे. खेत में लगाये। अंडे एवं इल्लियों को इकट्ठा करके नष्ट करें। खेत में टी. आकार की खूटियां 40 से 50 प्रति हे. लगाएं। जैविक नियंत्रण के लिये एन.पी.व्ही. 250 एल.ई., 250 सूंडी के बराबर के घोल को प्रति हे. खेत में छिड़काव करें।
Chemical solution:
1 मीटर में 10 से ज्यादा इल्लियां देखे जाने पर फसल को आर्थिक नुकसान होता है। अतः ऐसी अवस्था में रसायनों का प्रयोग करें जैसे-फसल के 30 से 35 दिन की अवस्था में क्विनालफास दवा 2 मि.ली. प्रति हे. पानी की दर से 1.5 ली. प्रति हे. खेत में छिड़काव करें अथवा ट्राइजोफास दवा 800 मि.ली. प्रति हे. छिड़काव करें।
Description:
Organic Solution:
खेत में गहरी जुताई करें। अनुशंसित बीजदर 70 से 100 किलोग्राम हे. का प्रयोग करें। नियमित रूप से फसल चक्र अपनाये। इल्लियों के झुण्डे को इकठ्ठा करके नष्ट करें। जैविक नियंत्रण के लिये एन.पी.व्ही. 250 एल.ई., 1250 सूंडी के बराबर के घोल को प्रति हे. खेत में छिड़काव करें। प्रकाश प्रपंच का उपयोग करें। बेसिलस थुरिनजिनसिस 1 लीटर या एक किलो ग्राम प्रति हे. के हिसाब से छिड़काव करें। नीम के तेल का उपयोग करें।
Chemical solution:
क्लोरपाइरीफॉस 20 ईसी @ 1.5 लीटर/हेक्टेयर या ट्राईजोफोस 40 ईसी @ 1.0 लीटर/हेक्टेयर या क्विनालफॉस 25 ईसी @ 1.5 लीटर/हेक्टेयर लगाएं। डस्ट क्लोरपाइरीफॉस 1.5% डीपी या क्विनालफॉस 1.5% डीपी @ 25 किग्रा/हेक्टेयर जब जनसंख्या 10/मी पंक्ति लंबाई (ईटीएल) तक पहुंचने की संभावना है।
Description:
Organic Solution:
फसल चक्र अपनाएं। खरपतवार प्रबंधन, खाद्य व उवर्रक प्रबंधन करें। जल निकास की उचित व्यवस्था करें। संक्रमण की शुरूआती अवस्था में पीले पड़े पत्तों को तोड़ दें और गाय के गोबर उपलो से बनी राख से डस्टिंग करें।
Chemical solution:
कीट का आक्रमण होने पर खेत में ट्राइजोफास 40 ई.सी. 800 से 1000 मिली. लीटर या मिथाइल डेमेटान 25 ई.सी. 800 मिली. लीटर प्रति हे. का छिड़काव करें। इमाडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. 5 मिली. लीटर प्रति किलो ग्राम बीज दर से बीजोपचार करें।
पूर्वमिश्रित बीटासायफ्लुथ्रीन 49 + इमिडाक्लोप्रिड 19.81% ओ.डी. का 350 एम.एल. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
पूर्वमिश्रित थायो मिथाक्जाम + लैम्बडासायहैलोथरीन का 125 एम.एल. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें यह सफेद मक्खी के साथ साथ पत्ती खाने वाले कीटों का भी नियंत्रण करता है।
Description:
Organic Solution:
ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई करें। इल्लियों एवं अंडों को इकट्ठा करके नष्ट कर दें। टी. आकार की खुटियां जिन पर पक्षी बैठकर इल्लियां खा सकें। 50 प्रति हे. खेत में लगाएं।
Chemical solution:
क्लोरोपाइरीफास 20 ई.सी. 1.5 ली या इंडोक्साकार्ब 14.8 एस.एल. 300 मिली लीटर प्रति हे. के हिसाब से छिड़काव से करें।
Description:
Organic Solution:
Chemical solution:
खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें।बीज को कार्बेन्डाजिम + मेंकोजेब 3 ग्राम प्रति किलो बीच की दर से उपचारित करें।
रोग के लक्षण दिखाई देने पर 5 ग्राम प्रति लीटर मेंकोजेब अथवा 1 ग्राम प्रति लीटर र्कावेंडाजिम का छिड़काव करें।
टेबुकोनाझोल का 625 एम. एल. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
Description:
Organic Solution:
रोग सहनषील किस्मे जैसे जे.एस.-2034, जे.एस.-2029, जे.एस.-9752 का उपयोग करें। ट्राइकोडर्मा विरडी से 4 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीज उपचारित करें।
Chemical solution:
खड़ी फसल में कार्बेनडाजिम 1 ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें।
खरीफ मौसम के दौरान सोयाबीन प्रमुख तिलहनी फसल है। बुवाई जून में शुरू होती है और सितंबर में फसल काटा जाता है। यह देखा गया है कि बुवाई और रोपण चरण के दौरान कीमतें गिरना शुरू हो जाती हैं, और जुलाई, अगस्त और सितंबर में फसल विकास चरणों के दौरान और गिरावट जारी रहती है।
भारत में सोयाबीन का उत्पादन महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में हावी है, जो कुल उत्पादन का 89 प्रतिशत योगदान देता है। राजस्थान, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और गुजरात शेष 11 प्रतिशत उत्पादन में योगदान करते हैं। महराष्ट्र में सोयाबीन में अग्रणी बनने की क्षमता है।
व्यापार मंडल ने कहा कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान राज्यों में फसल अच्छी स्थिति में है, जो देश के कुल उत्पादन का 90% से अधिक है। इसने कहा कि एक साल पहले सोयाबीन की पैदावार 22% बढ़कर 1,052 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर होने की उम्मीद है।
मध्यप्रदेश ने 2005 में सोयाबीन के कुल उत्पादन का 60 प्रतिशत उत्पादन करके देश में सोयाबीन में पहला स्थान हासिल किया। चना, मक्का और कुल दालों और तिलहन के उत्पादन में अधिकतम हिस्सेदारी हासिल करने में भी राज्य सबसे ऊपर है।
सोयाबीन पोषक तत्वों और लाभकारी पौधों के यौगिकों से भरपूर होते हैं। कम से कम संसाधित सोया खाद्य पदार्थों में समृद्ध आहार विभिन्न स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकते हैं, जिनमें बेहतर हृदय स्वास्थ्य, कम रजोनिवृत्ति के लक्षण और कुछ कैंसर का कम जोखिम शामिल है।
सितंबर-अक्टूबर: सोयाबीन की फसल की कटाई करें। यदि आवश्यक हो तो सुरक्षित भंडारण के लिए अनाज को लगभग 15% नमी तक सुखाएं।
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