Sesame (तिल)

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Watering

Low

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Cultivation

Manual

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Harvesting

Machine & Manual

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Labour

Low

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Sunlight

Low

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pH value

5.5 - 8

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Temperature

25 to 30 °C

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Fertilization

5 t/ha of FYM

Sesame (तिल)

Basic Info

तिल बीज (Sesame Seed Farming) एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है। यह खरीफ मौसम के अलावा, गर्मियों और अर्ध-सर्दियों के मौसम में भी लगाई जाती हैं। इस फसल को गुजरात और खासकर सौराष्ट्र में गर्मियों के मौसम में सफलतापूर्वक किया जा सकता है। ग्रीष्मकालीन तिल की खेती को ध्यान में रखने के लिए महत्वपूर्ण चीजें निम्नानुसार हैं। गर्मी के मौसम के हिसाब से यह किस्म बहुत ही उचित होती है और इस किस्म को पक्के तैयार होने में लगभग ढाई महीने से 3 महीने लगते हैं तिल कि फसल के लिए प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान के पास बहुत ही अनुकूल समय होता है।

Seed Specification

तिल की उन्नत किस्में :-
तिल की प्रमुख उन्नत किस्में, जैसे- टी- 4 टी- 12, टी- 13, टी- 78, राजस्थान तिल- 346, माधवी, शेखर, कनिकी सफेद, प्रगति, प्रताप, गुजरात तिल- 3, हरियाणा तिल, तरूण, गुजरात तिल- 4, पंजाब तिल- 1, ब्रजेश्वरी (टी एल के- 4) आदि है|

बीज की मात्रा :- 
4 से 5 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज की आवश्यकता होती है।

बीज उपचार :- 
बीज जनित रोग जड़ गलन की रोकथाम हेतु बीज को 2.5 ग्राम/किलोग्राम बीज की दर से केप्टान या थीरम फफूंदनाशक से उपचारित करना चाहिए। या 4 ग्राम ट्राइकोडर्मा विरिडी प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से उपचारित करें|

बुवाई का समय :-
तिल की बुवाई उचित समय पर करें, मानसून की प्रथम वर्षा के बाद जुलाई के प्रथम सप्ताह में बुवाई करें| बुवाई में देरी करने से फसल के उत्पादन में कमी होती जाती है| बुवाई के समय यदि तापमान 25 से 27 डिग्री सेन्टिग्रेड हो तो वह अंकुरण के लिये अच्छा रहता है| जायद सीजन के लिए मार्च महीने में बुवाई का समय सबसे सही होता है।

बुवाई की विधि :- 
बुवाई की विधि का तिल की उपज पर सीधा प्रभाव पड़ता है। तिल की बुवाई सीधी लाइनों में करनी चाहिए। लाईन से लाईन की दुरी 30 से 45 एवं पौधों से पौधों की दुरी 10 से 15 से. मी. रखनी चाहिए। तिल का बीज आकार में छोटा होता है, इसलिये इसे गहरा नही बोना चाहिये।

Land Preparation & Soil Health

खाद एवं रासायनिक उर्वरक :- 
तिल की बुवाई से पूर्व खेत तैयार करते समय अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद 10-15 टन /एकड़ मिट्टी में अच्छी तरह से मिला देनी चाहिए। तथा रासायनिक उर्वरक में 60 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 46 कि.ग्रा. फास्फोरस, और 15 कि.ग्रा. सल्फर प्रति हेक्टेयर देना चाहिए। फास्फोरस की पूरी मात्रा तथा नाइट्रोजन और सल्फर की आधी मात्रा बुवाई के समय खेत में डाल देनी चाहिए। तथा नाइट्रोजन और सल्फर की शेष आधी मात्रा जब फसल 30-35 दिन की हो जाये तब खड़ी फसल में छिड़काव  के रूप में देनी चाहिए।

हानिकारक कीट एवं रोग और उनके रोकथाम

हानिकारक कीट :-
गाल मक्खी - इसकी रोकथाम के लिए मोनोक्रोटोफॉस 36 डब्ल्यू. पी. या क्यूनालफास 25  ई.सी. एक लीटर /हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए है। 
फली एवं पत्ती छेदक - इसकी रोकथाम के लिए मोनोक्रोटोफॉस 36 डब्ल्यू. पी. या कार्बोरील 50 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण का फसल पर छिड़काव करे।

हानिकारक रोग :-
जड़ एवं तना गलन - इसकी रोकथाम के लिए बीज की बुवाई से पूर्व बीज को उपचारित करके बोना चाहिए। इस बीमारी से ग्रसित खेत में लगातार तिल की फसल नहीं लेनी चाहिए।
झुलसा एवं अंगमारी - इसकी रोकथाम के लिए मैन्कोजेब या जिनेब डेढ़ किलोग्राम या कैप्टान दो से ढाई किलोग्राम प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव करें| 15 दिन पश्चात छिड़काव पुनः दोहराएं|
भभूतिया रोग - इसकी रोकथाम के लिए चूर्ण सल्फर का भुरकाव करे। तथा मेंकोजेब 40 ग्राम या माइकोबुटानिल 10 % डब्ल्यू. पी., 10 ग्राम /15 लीटर पानी के साथ मिलाकर छिड़काव करे।

Crop Spray & fertilizer Specification

तिल बीज (Sesame Seed Farming) एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है। यह खरीफ मौसम के अलावा, गर्मियों और अर्ध-सर्दियों के मौसम में भी लगाई जाती हैं। इस फसल को गुजरात और खासकर सौराष्ट्र में गर्मियों के मौसम में सफलतापूर्वक किया जा सकता है। ग्रीष्मकालीन तिल की खेती को ध्यान में रखने के लिए महत्वपूर्ण चीजें निम्नानुसार हैं। गर्मी के मौसम के हिसाब से यह किस्म बहुत ही उचित होती है और इस किस्म को पक्के तैयार होने में लगभग ढाई महीने से 3 महीने लगते हैं तिल कि फसल के लिए प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान के पास बहुत ही अनुकूल समय होता है।

Weeding & Irrigation

खरपतवार नियंत्रण :-
पहले 45 दिनों तक तिल की फसल को खरपतवारों से मुक्त रखना पौधों की वृद्धि और विकास में मदद करता है। तिल के बीज बोने के तुरंत बाद, एलकोलर 1.5 एल / हेक्टेयर (10 लीटर पानी में 60 मिलीलीटर) जमीन पर स्प्रे करें। आवश्यकतानुसार हाथ की निराई और गुड़ाई करें। यदि लेबर की कमी हो तो बुवाई के 3 दिन बाद खड़ी फसल में क्विलेजोफोप इथाइल 0.05 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

सिंचाई :- 
खरीफ मौसम में फसल वर्षा आधारित होती है। अत: वर्षा की स्थिति, भूमि में नमीं का स्तर, भूमि का प्रकार एवं फसल की माँग अनुरुप सिंचाई की आवश्यकता भूमि में पर्याप्त नमीं बनायें रखने के लिये होती है। खेतों में एकदम प्रात:काल के समय पत्तियों का मुरझाना, सूखना एवं फूलों का न फूलना लक्षण दिखाई देने पर फसल में सिंचाई की आवश्यकता को दर्शाते हैं। अच्छी उपज के लिये सिंचाई की क्रांतिक अवस्थायें बोनी से पूर्व या बोनी के बाद, फूल आने की अवस्था और फली आने की अवस्था है, अत: इन तीनों अवस्थाओं पर सिंचाई अवश्य करें।

Harvesting & Storage

फसल कटाई :-
तिल (sesame) की फसल जो की ढाई महीने में पक्के तैयार हो जाएगी। फसल की सभी फल्लियाँ प्राय: एक साथ नहीं पकती किंतु अधिकांश फल्लियों का रंग भूरा पीला पड़ने पर कटाई करना चाहिये। फसल के गट्ठे बनाकर रख देना चाहिये। सूखने पर फल्लियों के मुॅह चटक कर खुल जायें तब इनको उल्टा करके डंडों से पीटकर दाना अलग कर लिया जाता है। इसके पश्चात् बीज को सुखाकर 9 प्रतिशत नमीं शेष रहने पर भण्डारण करना चाहिये।

उपज :-
लगभग इसका उत्पादन 5 से 6 क्विंटल प्रति एकड़ होता है, जो कि बहुत अच्छा है और यह वैरायटी जो कि बहुत ही कम समय में पक कर तैयार हो जाती हैं, 3 महीने में यह फसल किसानों के बोने से लगाकर वापस काट के घर लाया जा सकता है।


Crop Disease

Charcoal Rot (चारकोल रोट)

Description:
लक्षण मैक्रोफोमिना फेजोलिना के कारण होते हैं जो गहरे भूरे रंग का उत्पादन करते हैं, हाइपोथल जंक्शनों पर कसना दिखाते हुए सेक्लेमेट करते हैं। 30˚C या उससे ऊपर के दिन के तापमान और लंबे समय तक सूखा, जिसके बाद प्रचुर सिंचाई रोग का कारण बनती है।

Organic Solution:
बीज को ट्राइकोडर्मा के साथ 4 जी / किग्रा पर उपचारित करें। खेत की मेड़ या हरी पत्ती की खाद 10t / हेक्टेयर या नीम की खली 150 किग्रा / हेक्टेयर की दर से लगायें।

Chemical solution:
थायरम, इप्रोडायोनी, कार्बेन्डाजिम, पाइरक्लोस्ट्रोबिन, फ्लुक्विनकोनाजोल, टॉलफ्लुआनिड, और मेटलैक्सिल और पेनफ्लुफ़ेन + ट्राइफ्लोक्सिस्ट्रोबिन जैसे कवकनाशी का उपयोग उपयोगी हो सकता है।

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Frequently Asked Question

किस मौसम में तिल उगाया जाता है?

रोपण की तारीखें लोअर रियो ग्रांडे वैली में 15 मार्च तक और पैनहैंडल में जून की शुरुआत में देर से हो सकती हैं। सामान्य तौर पर, तिल को कपास या अनाज के शर्बत की तुलना में 2 से 3 सप्ताह बाद लगाया जाता है। लंबे समय से बढ़ते मौसमों और पर्याप्त गर्मियों में वर्षा या सिंचाई के पानी वाले क्षेत्रों में, जून या जुलाई में तिल का पौधा लगाएं।

तिल उगने में कितना समय लगता है?

तिल को परिपक्वता तक पहुंचने में 100-135 दिन लगते हैं और अंतिम ठंढ को सुनिश्चित करने के लिए कुछ सप्ताह पहले पौधों को शुरू करना एक सफल फसल सुनिश्चित करता है। एक समृद्ध बढ़ते माध्यम में गहरे ¼ बीज बोने से घर के अंदर पौधों को अंकुरित करें।

तिल भारत में कहां उगा है?

गुजरात कुल उत्पादन का 22.3% योगदान देने वाला अग्रणी तिल उत्पादक राज्य है, इसके बाद पश्चिम बंगाल (19.2%), कर्नाटक (13.5%), राजस्थान (9.8%), मध्यप्रदेश (9.06%), तमिलनाडु (4.7%), आंध्रप्रदेश (4.52%) और महाराष्ट्र (4.52%)शामिल हैं।

तिल किस प्रकार की फसल है?

तिल का बीज सबसे पुरानी तिलहन फसलों में से एक है, जिसे 3000 साल पहले अच्छी तरह से पालतू बनाया जाता था। सेसमम की कई अन्य प्रजातियां हैं, जो जंगली और उप-सहारा अफ्रीका की मूल निवासी हैं। एस. सिग्नम, संस्कारित प्रकार, भारत में उत्पन्न हुआ और सूखे जैसी परिस्थितियों के प्रति सहिष्णु है, जहां अन्य फसलें विफल हो जाती हैं।

तिल खाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

तिल को भूनकर, कुचलकर और फिर सलाद के ऊपर छिड़का भी जा सकता है। यह आपको आपके सामान्य सलाद की तुलना में अधिक विविधता और स्वाद देगा। किसी भी साइड डिश में क्रंच और स्वाद बढ़ाने के लिए कच्चे तिल डालें। उदाहरण के लिए, आप सब्जी या बीन व्यंजन में जोड़ सकते हैं।

तिल में कितने प्रतिशत तेल की मात्रा पायी जाती हैं ?

तिल सबसे पुरानी तिलहन फसलों में से एक है और एक महत्वपूर्ण तेल उपज वाली फसल है जिसमें तेल की मात्रा 40 से 50% होती है और इसे 'तिल' या 'गिंगेली' के नाम से जाना जाता है।

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