Medium
Machine & Manual
Machine & Manual
Medium
Low
5.5PH to 7.0 PH
20 to 30 °C
20 KG/ Acre NPK, Uria 50 KG/ Acre
Basic Info
Seed Specification
Land Preparation & Soil Health
Crop Spray & fertilizer Specification
Weeding & Irrigation
Harvesting & Storage
Description:
Organic Solution:
इस रोग कि रोकथाम के लिए बीज को थाइरम 2.5 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित कर बोयें | उन्नत प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग करें
Chemical solution:
रोकथाम हेतु खड़ी फसल में प्रोपिकोनोजोल 25 ई.सी. 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव डफ अवस्था में करें |
Description:
यह पंखहीन अथवा पंखयुक्त हरे रंग के चुभाने एवं चूसने वाले मुखांग वाले छोटे कीट होते है।
Organic Solution:
गर्मी में गहरी जुताई करनी चाहिए। समय से बुवाई करें। खेत की निगरानी करते रहना चाहिए। 5 किलो गंधपाश (फेरोमैन ट्रैप) प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करना चाहिए।
Chemical solution:
एजाडिरैक्टिन (नीम आयल) 0.15 प्रतिशत ई.सी. 2.5 ली0 प्रति हे. की दर से 500-600 ली. पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए। डाइमेथोएट 30 प्रतिशत ई.सी. ली. प्रति हे. की दर से 500-600 ली. पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए।मिथाइल-ओ-डेमेटान 25 प्रतिशत ई.सी. 1 ली. प्रति हे. की दर से 500-600 ली. पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए। मोनोक्रोटोफास 36 एस.एल. 750 मिली प्रति हे. की दर से से 500-600 ली. पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए।
Description:
दीमक सफेद मटमैले रंग का बहुभक्षी कीट है जो कालोनी बनाकर रहते हैं।
Organic Solution:
खेत में कच्चे गोबर का प्रयोग नहीं करना चाहिए। फसलों के अवशेषों को नष्ट कर देना चाहिए। नीम की खली 10 कुन्तल प्रति हे0 की दर से बुवाई से पूर्व खेत में मिलाने से दीमक के प्रकोप में कमी आती है। भूमि शोधन हेतु विवेरिया बैसियाना 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से 50-60 किग्रा0 अध सडे गोबर में मिलाकर 8-10 दिन रखने के उपरान्त प्रभावित खेत में प्रयोग करना चाहिए।ख
Chemical solution:
फसल में प्रकोप होने पर सिंचाई के पानी के साथ क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 2.5 ली0 प्रति हे0 की दर से प्रयोग करें।
Description:
गेहूं का पीला रतुआ रोग जनक आंशिक रूप से सर्वांगी है और बाद में परिपक्वता के समय जब टीलियो सोराई बनते हैं, तब ये रेखीय धारियां भद्दे काले रंग की हो जाती हैं| ये टीलियो सोराई भी लम्बें रेखीय धारियों में व्यवस्थित होती है और एपिडर्मिस द्वारा ढकी होती हैं तथा काले रंग में दिखती हैं|
Organic Solution:
बुआई के लिए अच्छे और स्वस्थ बीज का ही प्रयोग करें| रतुआ निरोधक किस्में 4 से 5 वर्ष के बाद रोग प्रतिरोधक रह जाती हैं| ऐसी स्थिति रतुआ कवकों में परिवर्तन होने पर आती है, अत: नवीनतम सहनशील किस्मों को प्रयोग में लायें| नाइट्रोजन प्रधान उर्वरकों की अत्याधिक मात्रा रतुआ रोगों को बढ़ाने में सहायक होती है, इसलिए उर्वरकों के संतुलित अनुपात में पोटाश की उचित मात्रा प्रयोग करें|
Chemical solution:
. छिड़काव के लिए प्रॉपीकोनेशेल 25 ई सी या टेबूकोनेजोल 25 ई सी (फोलिकर 250 ई सी) या ट्राईडिमिफोन 25 डब्ल्यू पी (बेलिटॉन 25 डब्ल्यू पी) का 0.1 प्रतिशत घोल बनाकर छिड़काव करें|
2. एक एकड़ खेत के लिए 200 मिलीलीटर दवा 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें|
3. पानी की उचित मात्रा का प्रयोग करें, फसल की छोटी अवस्था में पानी की मात्रा 100 से 120 लिटर प्रति एकड़ रखी जा सकती है|
4. गेहूं का पीला रतुआ रोग के प्रकोप और फैलाव को देखते हुए दूसरा छिड़काव 15 से 20 दिन के अंतराल पर करें|
भारत में, सर्दियों या रबी मौसम के दौरान गेहूं उगाया जाता है। फसल को नवंबर-दिसंबर के दौरान बोया जाता है और अप्रैल के आसपास काटा जाता है।
मिट्टी दोमट मिट्टी की दोमट या दोमट बनावट, अच्छी संरचना और मध्यम जल धारण क्षमता वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए आदर्श है। बहुत छिद्रपूर्ण और अत्यधिक सूखा तेल से बचने के लिए देखभाल की जानी चाहिए। मिट्टी को अपनी प्रतिक्रिया में तटस्थ होना चाहिए।
आदर्श रूप से, शीतकालीन गेहूं लगाया जाता है, जबकि मिट्टी और हवा का तापमान अभी भी यह सुनिश्चित करने के लिए गर्म है कि रोपाई जल्दी से और एक जोड़ी टिलर और एक मजबूत जड़ प्रणाली विकसित करने के लिए बहुत समय में उभर सकती है।
यह पतझड़ में लगाया जाता है, आमतौर पर अक्टूबर और दिसंबर के बीच, और सर्दियों में वसंत या शुरुआती गर्मियों में काटा जाता है। आमतौर पर परिपक्वता तक पहुंचने में लगभग चार से पांच महीने लगते हैं और यह वसंत के बगीचों में बहुत सुनहरा विपरीत बनाता है।
गेहूं किसी भी अन्य व्यावसायिक फसल की तुलना में अधिक भूमि क्षेत्र में उगाया जाता है और यह मनुष्यों के लिए सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न स्रोत बना हुआ है। इसका उत्पादन चावल, मक्का और आलू सहित सभी फसलों का नेतृत्व करता है।
उत्तर प्रदेश भारत में सबसे जादा गेहूँ उगाने वाला राज्य है | और देश के कुल गेहूँ उत्पाद के 34% यहाँ उगाई जाती है | यह फसल उत्तर प्रदेश के पूर्वी, पश्चिमी और उत्तरी भाग में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के 96 लाख हेक्टेयर भूमि में उगाई जाती है।
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