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Labour

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pH value

7-8

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Temperature

12 - 20 °C

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Fertilization

5 kg of nitrogen (in form of Urea@11 kg) and 20 Kg phosphorus (in form of SSP@ 125 kg) per acre.

Berseem (Bhukal) (बरसीम)

Berseem (Bhukal) (बरसीम)

Basic Info

बरसीम एक प्रकार की चारा वर्गीय फसल हैं, पशुओं के लिए बरसीम बहुत ही लोकप्रिय चारा है, क्यूंकि यह अत्यन्त पौष्टिक एवं स्वादिष्ट होता है। इसके अतिरिक्त यह लवणीय एवं क्षारीय भूमि को सुधारने के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति में भी वृद्धि करती है। बरसीम का पौधा 30 से 60 सेमी लम्बा होता है,  इसके फूल पीले-सफेद रंग के होते हैं। पशुपालन व्यवसाय में पशुओं से अधिक दुग्ध उत्पादन लेने के लिए बरसीम और अन्य हरे चारे का विशेष महत्व है। सर्दियों में पशुओं के हरे चारे की सबसे अधिक दिक्कत होती है। ऐसे में किसान अभी बरसीम की बुवाई कर दिसम्बर से मई तक अपने पशुओं को हरा चारा खिला सकते हैं।

Seed Specification

बुवाई का समय
इसकी बुआई के लिए सबसे उपयुक्त समय सितम्बर के अन्तिम सप्ताह से अक्टूबर के मध्य तक है।

दुरी
बरसीम की बुवाई छिटकाव या प्रसारण विधि द्वारा होती है। 

बीज की गहराई
यह मौसम के हालातों पर निर्भर करती है। बीज की गहराई 4-5 सैं.मी. होनी चाहिए। इसकी बुवाई शाम के समय करनी चाहिए।
 
बुवाई का तरीका
बरसीम की बुवाई छिड़काव या प्रसारण विधि द्वारा की जाती है।
 
बीज की मात्रा
बुवाई से पहले बीजों को पानी में भिगो देना चाहिए और जो बीज पानी के ऊपर तैरने लग जाये उन्हें निकाल दें। बीज की मात्रा 8-10 किलो प्रति एकड़ होनी चाहिए। अच्छी गुणवत्ता के चारे के लिए बरसीम के बीजों के साथ सरसों के 750 ग्राम बीज में मिलायें। ध्यान रहे बीज की गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए इसमें किसी प्रकार का खरपतवार बीज नहीं होना चाहिए।
 
बीज का उपचार
बुवाई से पहले बीज का उपचार राइज़ोबियम से कर लेना चाहिए। बुवाई से पहले राइज़ोबियम के एक पैकेट में 10 प्रतिशत गुड़ मिलाकर घोल तैयार कर लेना चाहिए। फिर इस घोल को बीज के ऊपर छिड़क देना चाहिए और बाद में बीज को छांव में सुखा देना चाहिए।

Land Preparation & Soil Health

खाद एवं रासायनिक उर्वरक
बरसीम की फसल की अच्छे विकास के लिए बुवाई के समय 10 किलोग्राम नाइट्रोजन और  30 किलोग्राम फासफोरस प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें।

Crop Spray & fertilizer Specification

बरसीम एक प्रकार की चारा वर्गीय फसल हैं, पशुओं के लिए बरसीम बहुत ही लोकप्रिय चारा है, क्यूंकि यह अत्यन्त पौष्टिक एवं स्वादिष्ट होता है। इसके अतिरिक्त यह लवणीय एवं क्षारीय भूमि को सुधारने के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति में भी वृद्धि करती है। बरसीम का पौधा 30 से 60 सेमी लम्बा होता है,  इसके फूल पीले-सफेद रंग के होते हैं। पशुपालन व्यवसाय में पशुओं से अधिक दुग्ध उत्पादन लेने के लिए बरसीम और अन्य हरे चारे का विशेष महत्व है। सर्दियों में पशुओं के हरे चारे की सबसे अधिक दिक्कत होती है। ऐसे में किसान अभी बरसीम की बुवाई कर दिसम्बर से मई तक अपने पशुओं को हरा चारा खिला सकते हैं।

Weeding & Irrigation

खरपतवार नियंत्रण
आरम्भ में बथुवा, खरतुआ, दूब, कृष्णनील, जंगली प्याजी, गजरी, सैजी, कासनी आदि खरपतवार बरसीम की फसल में दिखाई देते है। यदि फसल आरम्भ में खरपतवारों से दब जाती है, तो बढवार नहीं कर पाती है। जिससे उपज भी अच्छी नहीं मिल पाती है। अतः जहाँ तक संभव हो फसल के अंकुरण के बाद निराई-गुड़ाई करके खरपतवारों को निकाल देना चाहिए।

अमरलता (कसकुटा रिफलेक्सा) की संभावना हो तो फसल पर पैराकवट या डायकवट का 0.1 से 0.2 प्रतिशत घोल बना कर पहली या दूसरी कटाई के तुरन्त बाद छिड़काव करें। फसल-चक्र अवश्य अपनायें जिससे खरपतवारों का नियन्त्रण आसानी से किया जा सके। फसल की आरंभिक अवस्था में एक-दो कटाई जल्दी करके भी एक वर्षीय खरपतवारों पर काबू पाया जा सकता है।

सिंचाई
पहली सिंचाई हल्की ज़मीनों में 3-5 दिनों में और भारी जमीनों में 6-8 दिनों के बाद लगाएं। सर्दियों में 10-15 दिनों के फासले पर और गर्मियों में 8-10 दिनों के फासले पर पानी लगाएं।

Harvesting & Storage

फसल की कटाई
बरसीम में कुल चार-पांच कटाईया करते हैं। बरसीम को छह से आठ सेमी के ऊपर से कटना चाहिए। पहली कटाई बोने के 45 दिन बाद करनी चाहिए। इसके बाद कटाई दिसम्बर एवं जनवरी में 30 से 35 दिन बाद करते हैं और फरवरी में 20 से 25 दिन बाद कटाई करते हैं। इस प्रकार कुल चार से पांच कटाई केवल चारा प्राप्त करने हेतु की जाती हैI

उत्पादन
उपरोक्त वैज्ञानिक तकनीक से खेती करने पर फसल में बीज उत्पादन नहीं किया जाये तो प्रति हेक्टेयर औसत से अधिक लगभग 1000 क्विंटल हरा चारा प्राप्त होता हैं। बीज के लिए फसल को फरवरी बाद छोड़ दिया जाय तो 3 से 5 क्विंटल बीज तथा 500 से 600 क्विंटल हरा चारा लिया जा सकता है।

Crop Disease

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Frequently Asked Question

बरसीम की खेती कैसे करें?

बरसीम को आमतौर पर क्यारियों में फैलाकर और बीजों को मिट्टी में मिलाकर बोया जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि बीज छोटा होता है और इसलिए बुवाई से पहले इसे 1:1 के अनुपात में महीन सान के साथ समान रूप से बुवाई के लिए मिलाया जाता है। बीज दर 10 से 15 किग्रा/हेक्टेयर है। इसकी बुवाई 15 अक्टूबर से 15 नवम्बर तक की जाती है। 30 दिनों के अंतराल पर दो बार निराई-गुड़ाई की जाती है।

किस फसल को चारे का राजा कहा जाता है?

बरसीम सबसे महत्वपूर्ण चारा फसलों में से एक है और इसे चारे के राजा के रूप में वर्णित किया गया है। यह अत्यधिक सम्मानित चारा है जिसका पूरे देश में पशुपालन कार्यक्रमों में विशेष स्थान है।

क्या बरसीम पौष्टिक चारा है?

बरसीम सर्दियों के मौसम में बार-बार काटने से पशुओं के लिए अत्यधिक पौष्टिक और स्वादिष्ट चारा प्रदान करता है। इसमें 17% क्रूड प्रोटीन, 25.9% क्रूड फाइबर और 60-65% TDN (टोटल डाइजेस्टिबल न्यूट्रिएंट्स) की मात्रा होती है।

बरसीम कौन सी फसल हैं?

बरसीम एक प्रकार की चारा वर्गीय फसल हैं, पशुओं के लिए बरसीम बहुत ही लोकप्रिय चारा है, क्यूंकि यह अत्यन्त पौष्टिक एवं स्वादिष्ट होता है। यह एक तेजी से बढ़ने वाला, उच्च गुणवत्ता वाला चारा है जिसे मुख्य रूप से काटा जाता है और हरे कटे हुए चारे के रूप में खिलाया जाता है।

एक हेक्टेयर में बरसीम की बुवाई के बीज की मात्रा कितनी होनी चाहिए ?

साधारण द्विगुणित बरसीम की बीज दर 20-25 किलोग्राम जबकि विशाल बरसीम की बीज दर 30-35 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर होती है। पहली कटाई के लिए बुवाई के 55-60 दिनों में फसल तैयार हो जाती है।

भारत में बरसीम की खेती कब शुरू हुई ?

भारत में बरसीम उन्नीसवीं शताब्दी में आरम्भ में आयी। अमेरिका और यूरोप में भी इसकी खेती होती है।

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