Basic Info
आप जानते है कैथ, (कपित्थ) (कबीट) का वानस्पतिक नाम लिमोनिया एसिडिसिमा है और अंग्रेजी में इसे वुड ऐपल अथवा मंकी फ्रूट के नाम से जाना जाता है। कैथ के पेड़ पर्णपाती होते हैं और जंगलों में भी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। कैथ के पेड़ उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में बहुतायत में हैं। लेकिन आबादी वाले इलाको में इनकी संख्या कम होती जा रही है। दक्षिणी एशिया और जावा में ये पेड़ घरों के आसपास के बगीचों में उगाए जाते हैं। बीज से उगाए गए पौधे करीब 15 साल में फल देने के लायक होते हैं। कैथ के पत्तों से निकाले गए तेल का इस्तेमाल खुजली के उपचार सहित अन्य कई प्रकार की बीमारियों के इलाज के लिए औषधि के तौर पर सदियों से किया जाता रहा है। पके हुए कैथ के गूदे का स्वाद खट्टा-मीठा होता है और इसके बीज गूदे से ही लगे होते हैं।
Seed Specification
बुवाई का समय
कैथ के बीजों द्वारा प्रवर्धन का समय अधिक गर्मियों और मानसून (मई-जून माह)के शुरुआती दिनों का समय उपयुक्त होता है।
दुरी
पौधरोपण हेतु गड्ढो की सामान्यत दुरी 8 मीटर होना चाहिए।
बुवाई का तरीका
कैथ के पौध रोपण हेतु बीजों द्वारा नर्सरी तैयार करना और कलम विधि द्वारा पौधों का रोपण किया जाता है।
पौध रोपण का तरीका
पौध रोपण के लिए खेत में अप्रैल-मई माह में 3x3x3 फीट के गड्ढे खोद लेना चाहिए और गड्ढो को खुला छोड़ देना चाहिए जिससे की इनमें अच्छी तरह धुप लग जाये और गड्डे भूमिगत कीड़ों से मुक्त हो जाये। और पौध रोपण के समय गड्ढों को 3-4 टोकरी सड़ी गोबर की खाद, 20-25 कि.ग्रा. बालू तथा 1 किलोग्राम चूना मिलाकर 6-8 इंच ऊँचाई तक भर देना चाहिए।
बीज शोधन
बीज को लगभग 12 घंटों के लिए पानी में डुबाया जाता हैं इसके बाद इन्हे सीधे खेत में या नर्सरी में बोया जाता है।
Land Preparation & Soil Health
खाद एवं रासायनिक उर्वरक
कैथ की खेती में अच्छे उत्पादन के लिए एक वर्ष पुराने पौधे को 10 कि.ग्रा. गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट और रासायनिक उर्वरक में 500 ग्राम नाइट्रोजन, 250 ग्राम फास्फोरस, 500 ग्राम पोटाश प्रति वर्ष प्रति वृक्ष डालनी चाहिए। खाद एवं उर्वरकों को पूरी मात्रा जून-जुलाई माह में डालनी चाहिए।
Crop Spray & fertilizer Specification
आप जानते है कैथ, (कपित्थ) (कबीट) का वानस्पतिक नाम लिमोनिया एसिडिसिमा है और अंग्रेजी में इसे वुड ऐपल अथवा मंकी फ्रूट के नाम से जाना जाता है। कैथ के पेड़ पर्णपाती होते हैं और जंगलों में भी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। कैथ के पेड़ उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में बहुतायत में हैं। लेकिन आबादी वाले इलाको में इनकी संख्या कम होती जा रही है। दक्षिणी एशिया और जावा में ये पेड़ घरों के आसपास के बगीचों में उगाए जाते हैं। बीज से उगाए गए पौधे करीब 15 साल में फल देने के लायक होते हैं। कैथ के पत्तों से निकाले गए तेल का इस्तेमाल खुजली के उपचार सहित अन्य कई प्रकार की बीमारियों के इलाज के लिए औषधि के तौर पर सदियों से किया जाता रहा है। पके हुए कैथ के गूदे का स्वाद खट्टा-मीठा होता है और इसके बीज गूदे से ही लगे होते हैं।
Weeding & Irrigation
खरपतवार नियंत्रण
खरपतवार की रोकथाम के लिए आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई करना चाहिए।
सिंचाई
नये पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए एक दो वर्ष सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है। स्थापित पौधे बिना सिंचाई के भी अच्छी तरह से रह सकते है।
Harvesting & Storage
फलों की तुड़ाई
जब फलों का रंग गहरे हरे रंग से बदलकर पीला हरा होने लगे तो फलों की तुड़ाई 2 सें.मी. डंठल के साथ करनी चाहिए। तोड़ते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि फल जमीन पर न गिरने पायें। इससे फलों की त्वचा चिटक जाती है, जिससे फल भीतर से सड़ जाते है।
भंडारण
कैथ के फलों को नमी रहित सुखी जगह पर भंडारित करना चाहिए।