One District One Product- Tikamgarh

Tikamgarh



प्रदेश में अब किसानों की माली हालत में सुधार को लेकर सभी जिलों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है, इस अभियान के तहत टीकमगढ़ को एक जिला एक उत्पाद के तहत अदरक की खेती के लिए चुना गया है। अब इस जिले में अदरक की खेती पर विशेष महत्व दिया जाएगा।

अदरक की खेती टीकमगढ़ व निवाड़ी जिलों में अपार संभावना सहेजे हुए है। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो दोनों जिलों की खेती वाली मिट्टी स्वायल है, जो अदरक के लिए बहुत ही उपयुक्त है। तकीनीकी और उन्नत बीज के सम्मिश्रम से दोनों जिलों में अदरक की खेती की संभावनाएं शासकीय स्तर पर भी तलाश की जा रही है। 

टीकमगढ़ व निवाड़ी जिला सहित पूरे बुंदेलखंड में पानी की काफी किल्लत रहती है। अदरक की खेती के लिए बहुत अधिक पानी की जरूरत नहीं होती। वहीं यहां का वातावरण और मिट्टी की गुणवत्ता अदरक के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। खास बात यह कि गुणवत्ता युक्त अदरक की बीज और उचित देखभाल किया जाए तो प्रति एक किलो अदरक की बीज से औसतन आठ से दस किलोग्राम अदरक का उत्पादन लिया जा सकता है।

अदरक मुख्य रूप से उष्ण क्षेत्र  की फसल है। संभवत: इसकी उत्पत्ति दक्षिणी और पूर्व एशिया में भारत या चीन में हुई। भारत की अन्य भाषाओं में अदरक को विभिन्न नामो से जाना जाता है जैसे- आदू (गुजराती), अले (मराठी), आदा (बंगाली), इल्लाम (तमिल), आल्लायु (तेलगू), अल्ला (कन्नड.) तथा अदरक (हिन्दी, पंजाबी) आदि। अदरक का प्रयोग प्रचीन काल से ही मसाले, ताजी सब्जी और औषधी के रूप मे चला आ रहा है। अब अदरक का प्रयोग सजावटी पौधों के रूप में भी उपयोग किया जाने लगा है। अदरक के कन्द विभिन्न रंग के होते हैं। जमाइका की अदरक का रंग हल्का गुलाबी, अफ्रीकन अदरक (हल्की हरी) होती है।

अदरक का प्रयोग मसाले, औषधिया तथा सौन्र्दय सामग्री के रूप में हमारे दैनिक जीवन में वैदिक काल से चला आ रहा हैं। खुशबू पैदा करने के लिये आचारो, चाय के अलावा कई व्यजंनो में अदरक का प्रयोग किया जाता हैं। सर्दियों में खाँसी जुकाम आदि में किया जाता हैं। अदरक का सोंठ कें रूप में इस्तमाल किया जाता हैं। अदरक का टेल, चूर्ण तथा एग्लिओरजिन भी औषधियो में उपयोग किया जाता हैं

औषधियों के रूप में- सर्दी-जुकाम, खाँसी ,खून की कमी, पथरी, लीवर वृद्धि, पीलिया, पेट के रोग, वाबासीर, अमाशय तथा वायु रोगीयों के लिये दवाओ के बनाने में प्रयोग की जाती हैं।
मसाले के रूप में- चटनी, जैली, सब्जियो, शर्बत, लडडू, चाट आदि में कच्ची तथा सूखी अदरक का उपयोग किया जाता हैं।
सौंदर्य प्रसाधन में- अदरक का तेल, पेस्ट, पाउडर तथा क्रीम को बनाने में किया जाता हैं।

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