मत्स्य विभाग के अनुसार, प्रति वर्ष 13.34 लाख लोगों के लिए 14,600 टन मछली की आवश्यकता होती है, लेकिन जिले से कुल 3,110 टन ही उत्पादन होता है। शेष 11,490 टन मछली की आपूर्ति दूसरे राज्यों से की जाती है। भद्रक बैतरणी, सालंदी, गंगुटी, कपाली और कई अन्य नदियों से संपन्न है। ताजा मछली उत्पादन के लिए जिले में 3,67,111 हेक्टेयर जल निकाय हैं। झींगे की खेती के लिए 3812.42 हेक्टेयर तालाब और नदी के बहिर्वाह क्षेत्र हैं जबकि 10,000 वर्ग/किमी समुद्र का पानी 50 किलोमीटर के समुद्र तट के साथ फैला हुआ है।
बासुदेवपुर ब्लॉक भद्रक जिले में एक तटीय क्षेत्र है।
मो नाचा पोखिरी योजना के कारण कई किसान आत्मनिर्भर हो पाए हैं।
मत्स्य विभाग ने योजनान्तर्गत 148.68 एकड़ भूमि पर तालाब खोद कर मत्स्य पालन करने वाले 31 मत्स्य कृषकों को वित्तीय सहायता प्रदान की।
सरकार मछली पकड़ने के लिए 4.25 लाख रुपये की सब्सिडी के साथ 8.50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर भूमि प्रदान करती है।
Bhadrak
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