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खेती में कम लागत
और अधिक उत्पादन चाहने वाले किसानों के लिए फसल कटाई के बाद खेत की देखभाल करना
बहुत जरूरी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए
गहरी जुताई हरी खाद, गोबर की खाद और फसल
चक्र जैसे उपाय अपनाने से किसानों को लंबे समय तक फायदा होता है।
गहरी जुताई से बढ़ेगी मिट्टी की सेहत
फसल कटाई के बाद
गहरी जुताई मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है। इससे मिट्टी में
हवा का संचार बेहतर होता है और मिट्टी के अंदर मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया सक्रिय हो
जाते हैं, जो खेत को उपजाऊ बनाने में मदद करते हैं।
फसल अवशेषों का सही तरीके से निपटान करें
अक्सर किसान फसल
अवशेषों को जला देते हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। कृषि
वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर किसान इन अवशेषों को मिट्टी में मिला दें तो खेत
की उर्वरता बढ़ेगी और जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ेगी। इससे रासायनिक खादों पर
निर्भरता कम होगी और मिट्टी की प्राकृतिक ताकत बरकरार रहेगी।
मिट्टी की जांच करवाएं और पोषक तत्वों की पूर्ति करें
हर किसान को समय-समय पर अपने खेत की मिट्टी की जांच करवानी चाहिए। इससे मिट्टी में कौन से पोषक तत्वों की कमी है, इसका सही आकलन हो जाता है। जांच के आधार पर किसान अपने खेतों में सही खाद और उर्वरक का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे उत्पादन में वृद्धि होगी।
हरी खाद से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाएं
मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए किसानों को हरी खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। फसल कटाई के बाद खेत में ढैंचा, मूंग या उड़द जैसी फसलें बोई जा सकती हैं, जिससे मिट्टी में जैविक नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है और उर्वरता बनी रहती है।
फसल चक्र अपनाएं, मिट्टी रहेगी उपजाऊ
हर साल एक ही फसल बोने से मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है। इसलिए किसानों को फसल चक्र अपनाना चाहिए। एक साल दलहन, दूसरे साल तिलहन और तीसरे साल दूसरी फसलें उगाएं। इस प्रक्रिया से मिट्टी में संतुलन बना रहेगा और उत्पादन बढ़ेगा।
गोबर की खाद और वर्मीकम्पोस्ट से मिट्टी बनेगी उपजाऊ
गोबर की खाद और
वर्मीकम्पोस्ट मिट्टी के लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें मौजूद सूक्ष्म जीव मिट्टी को
उपजाऊ बनाते हैं और खेत को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं। किसानों को हर छह
महीने में अपने खेतों में गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट का इस्तेमाल जरूर करना
चाहिए।
अगर किसान उपरोक्त उपाय अपनाते हैं तो उनकी खेती की उत्पादकता बढ़ेगी और लागत कम होगी। मिट्टी का स्वास्थ्य बना रहेगा, जिससे हर फसल अधिक उत्पादन देगी।
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