One District One Product- Ratnagiri

Ratnagiri



रत्नागिरि (Ratnagiri) भारत के महाराष्ट्र राज्य के रत्नागिरि ज़िले में स्थित एक नगर है। यह उस ज़िले का मुख्यालय भी है। बाल गंगाधर तिलक की यह जन्‍मस्‍थली महाराष्ट् के दक्षिण-पश्चिम भाग में अरब सागर के तट पर स्थित है। यह कोंकण क्षेत्र का ही एक भाग है। यहां बहुत लंबा समुद्र तट हैं। यहां कई बंदरगाह भी हैं। यह क्षेत्र पश्चिम में सहयाद्रि पर्वतमाला से घिरा हुआ है। रत्नागिरि अल्‍फांसो आम के लिए भी प्रसिद्ध है।

महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में आम को एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत चयनित किया गया। 

रत्नागिरी- देवगड़ के विश्व प्रसिद्ध हापुस (अल्फांसो) आम को एक और नई पहचान मिल गई है। गुणवत्ता के मामले में इसे जिऑग्रफिकल इंडिकेशन (जीआई) से नवाजा गया है। जिऑग्राफिकल इंडिकेशन का इस्तेमाल किसी खास वस्तु के लिए किया जाता है जो उसके स्थान और ऑरिजिन को बताता है।

आमों के राजा अल्फांसो, जिसे महाराष्ट्र में 'हापुस' के नाम से जाना जाता है, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने स्वाद, शानदार खुशबू और जीवंत रंग के लिए मशहूर है।

भारत में आम की लगभग 1000 किस्में पाई जाती हैं, जिसमें से 30 किस्म के आमों की मांग विदेशों में सबसे ज्यादा है। महाराष्ट्र के रत्नागिरी के देवगण में पैदा होने वाले अलफान्सो यानी हापुस के अलावा दशहरी, चौसा, बादामी, लंगड़ा, तोतापरी, केसर, हिमसागर, बंगपाली या सफेदा व नीलम जैसे अन्य आम विदेशियों को खूब रास आते हैं। स्वास्थ्य के लिए आम उपयोगी माना जाता है। केवल एक आम दैनिक आहार की 40 प्रतिशत जरूरतों को पूरा कर सकता है तथा यह हृदय रोग, कैंसर और कोलेस्ट्रोल निर्माण को रोकने के लिए प्रतिरक्षक के रूप में कार्य करता है । इसके अलावा यह लज्जतदार फल पोटाशियम बेटा-करोटिन और एन्टी ऑक्सिडेंट्स का भंडार है।

रत्नागिरी जिला आम के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। 65,000 एकड़ से अधिक भूमि पर आम की खेती होती है, और भारत में अल्फांसो आमों का सबसे बड़ा उत्पादन रत्नागिरी में होता है।

रत्नागिरी में कई आम प्रसंस्करण इकाइयाँ हैं और कई आम उत्पादों को पूरे भारत में पहुँचाया जाता है और यूरोपीय और अन्य देशों को निर्यात किया जाता है। गर्मियां शुरू होते ही, कोंकण के मूल निवासियों के साथ-साथ हर कोई स्वादिष्ट अल्फांसो आमों का स्वाद लेने के लिए उत्सुक होता है। रत्नागिरी की गर्म और आर्द्र हवा और इसकी लाल मिट्टी आम की खेती का समर्थन करती है। पहाड़ी ढलानों और विभिन्न स्थानों पर स्थित हरे आम के बाग आकर्षक लगते हैं। गर्मी की छुट्टियों के दौरान इन बागों में जाया जा सकता है, जहां पेड़ों की ठंडी छाया के नीचे आराम करके आम के स्वादिष्ट स्वाद का आनंद लिया जा सकता है।

रत्नागिरी, गुहागर, लांजा और राजापुर में बड़े पैमाने पर आम की खेती की जाती है जहां हर साल 'मैंगो फेस्टिवल' होता है।

आम की फसल का उत्पादन तो वैसे सभी तरह की भूमि में किया जाता है लेकिन अच्छी जल धारण क्षमता वाली गहरी, बलुई दोमट सबसे उपयुक्त मानी जाती है। भूमि का पी.एच. मान 5.5-7.5 तक इसकी खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है। अल्फांसो के लिए खास तरह की जमीन और जलवायु की जरूरत होती है।

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