सोयाबीन की फसल पर लगने वाले प्रमुख कीटों से बचाने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

सोयाबीन की फसल पर लगने वाले प्रमुख कीटों से बचाने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
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Kisaan Helpline

Crops Jul 29, 2024
खेतों में विभिन्न कीटों का प्रकोप अक्सर फसलों की पैदावार को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, कीटों का सही समय पर नियंत्रण करना अति आवश्यक है ताकि फसल सुरक्षित रहें और पैदावार में कोई कमी न आए। आइये जानते है की प्रमुख कीटों की रोकथाम के लिए आवश्यक सुझाव:

तना मक्खी का नियंत्रण:


तना मक्खी के नियंत्रण हेतु सलाह हैं कि लक्षण दिखाई देने पर पूर्वमिश्रित कीटनाशक आइसोसायक्लोसरम 9.2 WW.DC (10% W/V) DC (600 मिली/हे.) या थायोमिथोक्सम 12.60%+लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 09.50% जेड.सी. (125 मिली./हे.) या बीटासायफ्लुथ्रिन+इमिडाक्लोप्रिड (350 मिली./हे.) या इंडोक्साकार्ब 15.8ई.सी. (333 मि.ली.) का छिड़काव करें।

पत्ती खाने वाले कीटों का नियंत्रण:


जहाँ पर फसल 15-20 दिन की हो गई हो, पत्ती खाने वाले कीटों से सुरक्षा हेतु फूल आने से पहले ही सोयाबीन फसल में क्लोरइंट्रानिलिप्रोल 18.5 एस.सी. (150 मिली/हे) का छिडकाव करें. इससे अगले 30 दिनों तक पर्णभक्षी कीटों से सुरक्षा मिलेगी।

चक्र भृंग (गिर्डल बीटल) का नियंत्रण:


चक्र भृंग के लक्षण दिखाई देने पर प्रारंभिक अवस्था में ही इसके नियंत्रण हेतु आइसोसायक्लोसरम 9.2% W/W Dc (10% W/V) DC (600 मिली/हे) या एसिटेमीप्रीड 25% + बायफेंथ्रिन 25% WG (250ग्रा./हे) या टेट्रानिलिप्रोल 18.18 एस.सी. (250-300 मिली/हे) या थायक्लोप्रिड 21.7 एस.सी. (750 मिली/हे) या प्रोफेनोफॉस 50 ई.सी (1 ली. है) या इमामेक्टीन बेन्जोएट (425 मिली /है) या क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एस.सी 18.50% SC (150 मिली/हे) का छिड़काव करें। यह भी सलाह दी जाती है कि इसके फैलाव की रोकथाम हेतु प्रारंभिक अवस्था में ही पौधे के ग्रसित भाग को तोड़कर नष्ट कर दें।

पत्ती खाने वाली इल्लियों और रस चूसने वाले कीटों का संयुक्त नियंत्रण:


पत्ती खाने वाली इल्लियों (सेमीलूपर/तम्बाकू/चने की इल्ली) तथा रस चूसने वाले कीट जैसे सफ़ेद मक्खी/जसीड एवं तना छेदक कीट (तना मक्खी/चक्र भंग) के एक साथ नियंत्रण हेतु पूर्व मिश्रित कीटनाशक जैसे क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 09.30 + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 09.50% जेड.सी. या थायोमिथोक्सम 12.60% + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 09.50% जेड.सी. (125 मिली./हे.) या बीटासायफ्लुथ्रिन+इमिडाक्लोप्रिड (350 मिली./हे.) का छिडकाव करें।

बिहार हेयरी कैटरपिलर का प्रकोप:


बिहार हेयरी कैटरपिलर का प्रकोप होने पर झुण्ड में रहने वाली इन इल्लियो को प्रारंभिक अवस्था में ही पौधे सहित खेत से निष्कासित करें एवं फसल पर लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 04.90% CS (300 मिली/हे.) या इंडोक्साकार्ब 15.80% EC (333 मिली/हे.) छिडकाव करें।"

किसान भाई इन बातों का अवश्य ध्यान रखें की समय-समय पर अपने खेतों का निरीक्षण करें और कृषि विशेषज्ञों द्वारा बताए गए कीटनाशकों का उपयोग करें। यह न केवल फसल की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगा, बल्कि उत्पादन को भी बढ़ावा देगा।

इन सिफारिशों का पालन करते समय, उत्पाद की सही मात्रा और छिड़काव की विधि का विशेष ध्यान रखें। यह जानकारी केवल मार्गदर्शन के लिए है, विस्तृत जानकारी और खेत की स्थिति के अनुसार स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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