Kisaan Helpline
भारत के किसानों के लिए गेहूं की खेती बहुत महत्वपूर्ण है। इस समय रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही किसान गेहूं की बुवाई में व्यस्त हैं। गेहूं की खेती से अच्छे मुनाफे की उम्मीद है, लेकिन अगर फसल संक्रमित हो गई तो किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि किसान इन बीमारियों की पहचान करें और समय रहते फसल को बचाने के उपाय करें।
लक्षण: यह रोग पत्तियों पर छोटे नारंगी और भूरे रंग के धब्बों के रूप में दिखाई देता है। ये धब्बे पत्तियों की ऊपरी और निचली सतह पर होते हैं। जैसे-जैसे पौधा बढ़ता है, यह रोग तेजी से फैलता है। इसका प्रकोप उत्तर और पूर्वी भारत, जैसे पंजाब, बिहार और उत्तर प्रदेश में ज्यादा होता है।
एक ही किस्म की फसल को बड़े क्षेत्र में न लगाएं।
रोग के शुरुआती लक्षण दिखने पर प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी या टेबुकोनाजोल 25 ईसी का छिड़काव करें।
प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी या टेबुकोनाजोल 25 ईसी के 0.1% घोल का छिड़काव करें।
10-15 दिनों के अंतराल पर दूसरा छिड़काव करें।
लक्षण: यह रोग तनों पर भूरे-काले धब्बों के रूप में दिखाई देता है, जो बाद में पत्तियों तक फैल जाता है। इसका प्रभाव तनों को कमजोर कर देता है, जिससे दाने झिल्लीदार और छोटे हो जाते हैं। यह रोग दक्षिणी पहाड़ी क्षेत्रों और मध्य भारत में अधिक पाया जाता है।
फसल की नियमित निगरानी करें।
प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी या टेबुकोनाजोल 25 ईसी के 0.1% घोल का छिड़काव करें।
10-15 दिनों के अंतराल पर दूसरा छिड़काव करें।
लक्षण: पत्तियों पर पीली धारियाँ बन जाती हैं। हाथ से छूने पर एक पीला चूर्ण जैसा पदार्थ निकलता है। यह रोग हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक पाया जाता है।
पीले रतुआ प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें।
खेत की निगरानी करते रहें, खासकर पेड़ों के आसपास उगने वाली फसलों की।
प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी या टेबुकोनाजोल 25 ईसी के 0.1% घोल का छिड़काव करें।
लक्षण: ये छोटे हरे कीट पत्तियों और बालियों का रस चूसते हैं। इनके कारण काली फफूंद का प्रकोप बढ़ जाता है, जो फसल को नुकसान पहुंचाता है।
खेत की गहरी जुताई करवाएं।
फेरोमोन ट्रैप लगाएं।
क्विनालफॉस 25% ईसी की 400 मिली मात्रा को 500-1000 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।
खेत के चारों ओर मक्का, ज्वार या बाजरा लगाएं।
लक्षण: ये छोटे पंखहीन कीट पौधों की जड़ों को खाकर उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं। सूखी मिट्टी में दीमक का प्रकोप अधिक होता है। प्रभावित पौधे कुतरते हुए दिखाई देते हैं।
खेत में गोबर की खाद डालें तथा पुरानी फसल के अवशेषों को नष्ट करें।
प्रति हेक्टेयर 10 क्विंटल नीम की खली डालकर बीज बोएं।
सिंचाई के समय 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से क्लोरपाइरीफॉस 20% ईसी का प्रयोग करें।
Smart farming and agriculture app for farmers is an innovative platform that connects farmers and rural communities across the country.
© All Copyright 2024 by Kisaan Helpline