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बांदीकुई। इस बार मंडी में बाजरे की बंपर आवक नहीं हुई। काश्तकार बाजरा तो लाने लगे हैं लेकिन गत साल की तुलना में आधा है। वर्तमान में मंडी में रोज एक हजार बोरी की आवक है जबकि गत साल इन दिनों 2 हजार बोरी से शुरुआत हुई।
इस बार चौमासा नहीं बरसा। मानसून की पहली बरसात तो फिर भी समय पर हुई। इसके बाद कुछ दिन तक हल्की बारिश का दौर चलता रहा। एक महीने बाद मानसून ऐसा गायब हुआ कि किसानों के सारे अरमान धूमिल कर दिया। बोआई के बाद एक बार तो खेतों में फसल लहलहाने लगी थी, पर पूरा सावन और आधा भादवा सूखा ही निकल गया। इस दौरान तेज गर्मी धूप से फसलें खेतों में ही झुलस गई। कुछ किसानों ने िजनके पास साधन पानी का जुगाड़ था उन्होंने एक आद सिंचाई कर दी, उन खेतों में थोड़ा बहुत अनाज हुआ है। मानसून की बेरूखी से 70 फीसदी से ज्यादा फसल बर्बाद हो गई।
इस बार बसवा तहसील क्षेत्र में बरसात की बेरूखी का असर बाजरे की फसल पर देखने को मिल रहा है। अधिकांश जगह फसल चौपट हो गई। इसका असर अनाज मंडी में भी देखने को मिला। मंडी में 4-5 दिन से इस सीजन के बाजरे की आवक शुरू हुई। शुरूआत में तो 700 बोरी के साथ हुई लेकिन वर्तमान में यह एक हजार बोरी तक सिमट गया।
व्यापारियों ने बताया कि गत वर्ष बाजरे की शुरूआत 2 हजार बोरी से हुई थी लेकिन इस बार बरसात की कमी के कारण आधी है। गत वर्ष इस समय बाजरे का कारोबार अच्छा खासा हुआ था। व्यापारियों को देर रात तक फुर्सत नहीं थी, लेकिन इस बार बाजरे की कमी के कारण किसानों के साथ व्यापारी भी कारोबार मंदा होने की आशंका से परेशान नजर रहे हैं।
इस बार भाव में भी तेजी
गतवर्ष मंडी में बाजरे की बंपर आवक होने से शुरू में बाजरे की कीमत 1100 रुपए प्रति क्विंटल थी लेकिन इस बार 1300 से लेकर 1350 रुपए तक बिक रहा है। व्यापारी इसके पीेछे प्रमुख रुप से कारण बाजरे की आवक कम होना बता रहे हैं।
क्वालिटी में भी कमी
मंडीमें रहे बाजरे की इस बार क्वालिटी में भी कमी है। व्यापारियों ने बताया कि गत वर्ष बाजरा मोटा तथा कलर साफ था। लेकिन इस बार बाजरा बारिक है
आगे भी कम आने की उम्मीद
मंडी में व्यापारियों को आगे भी बाजरा कम आने की उम्मीद है। व्यापारियों ने बताया कि बरसात की कमी के कारण खेतों में बाजरे की फसल सूख चुकी है। ऐसे में इस बार आवक कम होने की उम्मीद है
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