lavender (लैवेंडर)

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Cultivation

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Sunlight

Low

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pH value

6.8 -7.5

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Temperature

20 -30° C

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Fertilization

N-P-K 8:4:4 per acre

lavender (लैवेंडर)

lavender (लैवेंडर)

Basic Info

लैवेंडर एक अत्यंत उपयोगी बहुवर्षीय औषधीय गुणों वाला और सुन्दर सुंगंधित झाड़ीनुमा पौधा हैं। लैवेंडर के पौधे में तेल की मात्रा भी पाई जाती हैं, जिसका इस्तेमाल खाने के साथ साथ साबुन, इत्र और सौंदर्य प्रसाधन की चीजों को बनाने में किया जाता हैं, इसके अलावा इसके पौधे का इस्तेमाल कई तरह की बिमारियों के रोकथाम में भी किया जाता हैं, इसके फूलों का रंग गहरा काला नीला, लाल और बेंगानी ज्यादा पाया जाता हैं, इसका पौधा दो से तीन फिट ऊंचाई का पाया जाता हैं। लैवेंडर की खेती नगदी फसल के रूप में की जाती हैं। लैवेंडर की खेती मुख्यत: भूमध्यसागरीय देशों के साथ-साथ, सयुंक्त राज्य अमेरिका, कनाड़ा, जापान, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड आदि देशों में की जा रही हैं। भारत में लैवेंडर की खेती कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में मुख्य रूप से की जाती है।

Seed Specification

उपयुक्त समय
लैवेंडर के पौधों की रोपाई वैसे तो पूरे सालभर की जा सकती हैं लेकिन इसे अप्रैल माह में उगाना अच्छा माना जाता हैं।

बुवाई का तरीका 
लैवेंडर के पौधे बीज और कलम दोनों माध्यम से लगाए जाते हैं, लेकिन कलम के माध्यम से लगाना सबसे उपयुक्त होता है।

नर्सरी तैयार करना
लैवेंडर की खेती बीज और पौधों दोनों माध्यम से की जा सकती हैं, लेकिन पौध लगाने से पैदावार जल्दी और अधिक मिलती हैं। इसकी पौध नर्सरी में नवम्बर और दिसम्बर माह में तैयार की जाती है। इसके बीजों का अंकुरण तभी होता हैं जब तापमान 12 से 15 डिग्री के बीच पाया जाता है। इसके अलावा नर्सरी में इसके पौधे उत्तक संवर्धन के माध्यम से भी आसानी से तैयार किया जा सकते हैं। कटिंग के माध्यम से इसकी पौध तैयार करने के दौरान इसके एक या दो साल पुराने पौधों की शाखाओं का इस्तेमाल किया जाता है। जिन्हें नर्सरी में उर्वरक देकर तैयार की गई क्यारियों में 5 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाकर पौध तैयार करते हैं।

दुरी
खेत में मेड तैयार करने के दौरान प्रत्येक मेड़ों के बीच 1-1.5 मीटर के बीच दूरी होनी चाहिए, मेड पर इसकी पौध की रोपाई के दौरान उन्हें आपस में 25-30 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाना चाहिए।

बीज की मात्रा
एक हेक्टेयर में औसतन 20 हज़ार के आसपास पौधे लगाए जाते हैं।

Land Preparation & Soil Health

खाद एवं रासायनिक उर्वरक
लैवेंडर की फसल की अच्छी बढ़वार के लिए खाद एवं उर्वरक की आवश्यकता होती है, इसकी पूर्ति हेतु 6 टन/एकड़ की दर से अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद खेत तैयारी के समय मिट्टी में मिला देना चाहिए। तथा रासायनिक उर्वरक मिट्टी परिक्षण के आधार पर देना चाहिए।

Crop Spray & fertilizer Specification

लैवेंडर एक अत्यंत उपयोगी बहुवर्षीय औषधीय गुणों वाला और सुन्दर सुंगंधित झाड़ीनुमा पौधा हैं। लैवेंडर के पौधे में तेल की मात्रा भी पाई जाती हैं, जिसका इस्तेमाल खाने के साथ साथ साबुन, इत्र और सौंदर्य प्रसाधन की चीजों को बनाने में किया जाता हैं, इसके अलावा इसके पौधे का इस्तेमाल कई तरह की बिमारियों के रोकथाम में भी किया जाता हैं, इसके फूलों का रंग गहरा काला नीला, लाल और बेंगानी ज्यादा पाया जाता हैं, इसका पौधा दो से तीन फिट ऊंचाई का पाया जाता हैं। लैवेंडर की खेती नगदी फसल के रूप में की जाती हैं। लैवेंडर की खेती मुख्यत: भूमध्यसागरीय देशों के साथ-साथ, सयुंक्त राज्य अमेरिका, कनाड़ा, जापान, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड आदि देशों में की जा रही हैं। भारत में लैवेंडर की खेती कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में मुख्य रूप से की जाती है।

Weeding & Irrigation

खरपतवार नियंत्रण
खरपतवार की रोकथाम के लिए समय-समय पर आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई करना चाहिए।

सिंचाई
लैवेंडर की खेती के लिए सिंचाई की ज्यादा जरूरत होती हैं। इसके पौधों को खेत में लगाने के तुरंत बाद उनकी सिंचाई कर देनी चाहिए। उसके बाद खेत में नमी बनाए रखने के लिए आवश्यकता के अनुसार पानी देते रहना चाहिए। ध्यान रहे खेत में जल भराव नहीं होना चाहिए।

Harvesting & Storage

फसल की कटाई
लैवेंडर के पौधे रोपाई के लगभग तीन साल बाद अच्छी तरह से पैदावार देना शुरू कर देते हैं। इससे पहले इनकी पैदावार काफी कम प्राप्त होती हैं। लेकिन तीन साल बाद के बाद लगभग चार से पांच साल तक इनके पौधों से अच्छी मात्रा में पैदावार प्राप्त होती हैं। इसके फूलों की कटिंग तब करनी चाहिए जब पौधों में लगभग 50 प्रतिशत से ज्यादा फूल खिल चुके हों।
इसके पौधे पर फूल पहले साल में ही आने लग जाते हैं। जिन्हें जमीन की सतह से कुछ सेंटीमीटर की दूरी छोड़ते हुए तेज़ धार वाले हथियार से काट लेना चाहिए। इसके तने की कटाई के दौरान काटी गई शाखाओं की लम्बाई फूल सहित लगभग 12 सेंटीमीटर से कम नही होनी चाहिए। इसके फूलों की कटिंग के बाद उन्हें निम्न तापमान पर रखकर अधिक समय तक उपयोग में लिया जा सकता हैं।

पैदावार और लाभ
लैवेंडर के फूलों से किसान भाई कई तरह से कमाई कर सकता हैं। इसके फूलों को बाज़ार में सजावट के रूप में बेचकर नगद लाभ कमा सकता हैं। इसके अलावा इसके फूलों से तेल निकालकर उसे बेचकर लाभ कमा सकता हैं। इसके तेल का बाज़ार में काफी महँगा बिकता हैं। जिससे किसान भाई अच्छी आमदनी कमा सकता हैं।

Crop Disease

Alfa Mosaic Virus ( अल्फा मोज़ेक वायरस )

Description:
{अल्फा मोज़ेक वायरस असाधारण रूप से संक्रामक है और एफिड्स और मानव संपर्क दोनों द्वारा फैलाया जाता है। यह जानलेवा भी है।}

Organic Solution:
पीला मोजाइक वायरस फैलाने वाली सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए बीज को थायोमिथोक्साम 30 एफ.एस. से 3 ग्राम अथवा इमिडाक्लोप्रिड एफ.एस. 1.25 मिलीलीटर प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें।

Chemical solution:
फसल पर सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए बीज को थायोमिथोक्साम 25 डब्ल्यू.जी. का 100 ग्राम को 500 लीटर पानी में घोल कर/ हे. की दर से छिड़काव करें।

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Lavender shab disease (लैवेंडर शब रोग )

Description:
{यह एक कवक है जो लैवेंडर के तने को मारता है। यह बीमारी अमूमन मिट्टी में अतिरिक्त पानी का नतीजा होती है। जल निकासी में सुधार रोग के दबाव को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है। उत्पादकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि खरीदी गई पौध सामग्री रोग से मुक्त हो।}

Organic Solution:
नियंत्रण के लिए प्लास्टिक या कपड़े गीली घास का उपयोग किया जाता है, तो ताज के चारों ओर वातारण बढ़ाने के लिए अप्रभावित पौधों के चारों ओर गीली घास खोलने पर विचार करें। जहां पौधों को हटा दिया जाता है, पंक्ति के नीचे पीड़ित मिट्टी छिड़काव से वर्षा को रोकने के लिए छेद पर प्लास्टिक की एक ठोस चादर लगाने पर विचार करें ।

Chemical solution:
‎हर हफ्ते लैवेंडर का इलाज पहले हाइड्रोजन पेरोक्साइड कीटाणुनाशक, फिर एक जैविक कवकनाशी छिड़ककर।‎

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