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गर्मी के मौसम में किसान अतिरिक्त आमदनी के
लिए विभिन्न फसलों की खेती कर सकते हैं। जिन किसानों ने गेहूं, चना, मसूर या लोबिया
जैसी रबी फसलों की कटाई पूरी कर ली है, वे उचित जल प्रबंधन के साथ गर्मी की फसलों की बुवाई कर सकते हैं। कृषि
वैज्ञानिकों के अनुसार गर्मी में मक्का, भिंडी और लोबिया की खेती करने से अच्छा उत्पादन और बेहतर मुनाफा मिल सकता है।
आइए जानते हैं इन फसलों की बुवाई के लिए जरूरी तैयारी और सही तकनीक।
गर्मी में मक्का की
बुवाई का सही तरीका
मक्का की अच्छी
पैदावार के लिए बलुई दोमट या दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है, जिसका पीएच मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए। खेत की तैयारी के लिए एक बार मिट्टी
पलटने वाले हल से जुताई करें और फिर कल्टीवेटर से 2-3 बार जुताई करके
मिट्टी को भुरभुरा बना लें। मक्का की उन्नत किस्मों जैसे पीएमएच-7, पीएमएच-8, पीएमएच-10, कंचन, गौरव, विवेक मक्का, हाइब्रिड-27 आदि का चयन करें।
बुवाई के लिए मुख्य
बिंदु:
·
बीज दर: 20-22 किलोग्राम/हेक्टेयर।
·
पंक्ति के बीच की दूरी 45 सेमी तथा पौधे से पौधे की
दूरी 20 सेमी रखें।
·
खाद प्रबंधन: नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश की मात्रा 40:50:60 किलोग्राम/हेक्टेयर रखें।
·
फॉस्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय तथा नाइट्रोजन की आधी
मात्रा बुवाई के समय तथा शेष दो भागों में दें।
गर्मियों में भिंडी
की खेती करने का सही तरीका
भिंडी की खेती के
लिए हल्की और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी सबसे अच्छी होती है। गर्मियों में भिंडी
उगाने के लिए पूसा सावनी, पूसा मखमली, परभणी क्रांति और
अर्का अनामिका जैसी उन्नत किस्मों का चयन करें।
बुवाई के लिए मुख्य
बिंदु:
·
बीज दर: 20-22 किलोग्राम/हेक्टेयर।
·
पंक्ति के बीच की दूरी 45 सेमी तथा पौधे से पौधे की
दूरी 20 सेमी रखें।
·
खाद प्रबंधन: नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश की मात्रा 40:50:60 किलोग्राम/हेक्टेयर रखें।
·
फॉस्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय तथा नाइट्रोजन की आधी
मात्रा बुवाई के समय तथा शेष दो भागों में दें।
ग्रीष्म ऋतु में
लोबिया की खेती का सही तरीका
लोबिया कम अवधि की
फसल है, जिसे किसान गर्मी के मौसम में आसानी से उगा सकते हैं।
उन्नत किस्मों में पूसा कोमल, पूसा सुकोमल, काशी गौरी, काशी कंचन शामिल
हैं।
बुवाई के लिए मुख्य
बिंदु:
· बीज दर: 18-20 किलोग्राम/हेक्टेयर।
· पंक्ति के बीच की
दूरी 45-60 सेमी तथा पौधे से
पौधे की दूरी 10 सेमी रखें।
· खाद प्रबंधन:
नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की मात्रा 20:60:50 किलोग्राम/हेक्टेयर रखें।
· फास्फोरस और पोटाश
की पूरी मात्रा बुवाई के समय दें और नाइट्रोजन की आधी मात्रा दो भागों में दें।
उचित बुवाई से
अच्छी आय होगी
अगर किसान सही समय
पर और सही तकनीक से ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई करें तो उन्हें बेहतर उत्पादन और
अधिक लाभ मिल सकता है। साथ ही, मिट्टी की उर्वरता
बनाए रखने के लिए फसल चक्र अपनाना भी जरूरी है।
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