Land Preparation & Soil Health
उर्वरक एवं खाद
खाद बिन के तल पर 6-8 इंच की परत बुरादा फैलाएं। चूरा पानी के साथ अच्छी तरह से संतृप्त करें और इसे कुक्कुट खाद या घोड़े की खाद की 2 इंच की परत के साथ कवर करने से पहले रात भर रहने दें। गाय की खाद का उपयोग न करें, क्योंकि यह चिकन, टर्की या घोड़े की खाद के रूप में नाइट्रोजन युक्त नहीं है।
Crop Spray & fertilizer Specification
मशरुम की खेती का प्रचलन भारत में करीब 200 सालों से है। हालांकि भारत में इसकी व्यावसायिक खेती की शुरुआत हाल के वर्षों में ही हुई है। मशरूम कवक वर्ग का एक पौधा है। इसका कवक जाल ही इसका फलभाग होता है जिसे मशरूम कहा जाता है। कुछ लोग मशरूम का अर्थ कुकुरमुत्ते से लगाते हैं। यह गलत है। वास्तव में कुकुरमुत्ता तो मशरूम की ही एक विषैली जाति होती है तो खाने योग्य नहीं होती। बीजों द्वारा उगाया गया मशरूम सौ फीसदी खाने योग्य होता है। आज इसकी गणना भरपूर विटामिनों वाली सब्जियों में की जाती है। हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान (शीतकालीन महीनों में) जैसे राज्यों में भी मशरुम की खेती की जा रही है। जबकि इससे पहले इसकी खेती सिर्फ हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पहाड़ी इलाकों तक ही सीमित थी। मशरुम प्रोटीन, विटामिन्स, मिनरल्स, फॉलिक एसिड का बेहतरीन श्रोत है। यह रक्तहीनता से पीड़ित रोगी के लिए जरूरी आयरन का अच्छा श्रोत है।
मशरूम मुख्यतः तीन प्रकार की होती है।
1. बटन मशरुम - बटन मशरुम सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। बड़े पैमाने पर खेती के अलावे मशरुम की खेती छोटे स्तर पर एक झोपड़ी में की जा सकती है।
2. ढिंगरी (घोंघा) - यह भी एक स्वादिष्ट एवं खाने-योग्य खुम्बी है जिसको कुछ गर्म क्षेत्र जैसे 20-28 डी०सेग्रेड तापमान पर उगाया जा सकता है। इस समय आर्द्रता भी 75-80 प्रतिशत होना आवश्यक है।
3. पुआल मशरुम (सभी प्रकार के) - यह भी एक मशरूम की किस्म है जो अत्यधिक स्वादिष्ट तथा मैदानी क्षेत्रों में पूरे वर्ष उगने वाली मशरूम है। इसकी खेती धान के पुआल पर सफलतापूर्वक की जा सकती है जहां पर 25 डी०सेग्रेड तापमान से कम रहता है। वहां मुश्किल खेती की जाती है जहां पर तापमान अधिक रहता है। अर्थात् 25-32 डी०सेग्रेड तापमान पर सुगमतापूर्वक उगाया जाता है।
Weeding & Irrigation
पानी की आवश्यकता
नमी के लिए मशरूम की जरूरत आपको पौधे लगाने से पहले शुरू होती है। उन्हें विकसित करने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर खाद की आवश्यकता होती है, और उस खाद को बनाने में पानी लगता है। एक आदर्श सब्सट्रेट घोड़ा खाद है जिसे भूसे के साथ मिश्रित किया जाता है। पूरी तरह से नम होने तक ढेर को गीला करें, इसे पूरे पानी में मिलाएं।
Harvesting & Storage
फसल अवधि
एक वर्ष में लगभग 5 से 6 फसलें ली जा सकती हैं क्योंकि कुल फसल अवधि 60 दिन है। सीप मशरूम मध्यम तापमान पर 20 से 300 C और आर्द्रता 55-70% तक वर्ष में 6 से 8 महीने की अवधि तक बढ़ सकता है। इसकी वृद्धि के लिए आवश्यक अतिरिक्त आर्द्रता प्रदान करके गर्मी के महीनों में भी इसकी खेती की जा सकती है।
कटाई समय
दो से तीन सप्ताह, जब मशरूम के खेत में खाद दी जाती है, तब भी मशरूम की कटाई के साथ शुरुआत करने से पहले 16 से 20 दिन लगते हैं। कटाई दो से तीन सप्ताह के दौरान होती है। इसके बाद यह अब फसल की लागत प्रभावी नहीं है।
उपज दर
प्रति 100 किलोग्राम ताजा मशरूम, ताजा खाद दो महीने की फसल में प्राप्त की जा सकती है। प्राकृतिक परिस्थितियों में खाद तैयार करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लघु विधि से अधिक उपज (15-20 किलोग्राम प्रति 100 किलोग्राम) मिलती है।
सफाई और सुखाने
मशरूम को गर्म पानी में डालकर लगभग एक इंच ढक दें। जब तक वे नरम न हो जाएं, तब तक उन्हें तरल से बाहर निकालें (इसे फेंक न दें) और ठंड के तहत उन्हें धोकर साफ़ करना, किसी भी ग्रिट के लिए महसूस करते हुए पानी चलाना ताकि आप इसे ढीला कर सकें और इसे धोकर साफ़ कर सकें।
सौ बात की एक बातः- मशरुम की खेती कम लागत और कम मेहनत में बहुत अच्छा मुनाफा देती है।
सावधानी
मशरूम का उत्पादन अच्छी कम्पोस्ट खाद तथा अच्छे बीज पर निर्भर करता है अत: कम्पोस्ट बनाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए । कुछ भुल चूक होने पर अथवा कीडा या बीमारी होने पर खुम्बी की फसल पूर्णतया या आंशिक रूप से खराब हो सकती है।