Sanjay Kumar Singh
10-05-2023 01:27 AMप्रोफेसर (डॉ) एसके सिंह
प्रधान अन्वेषक, अखिल भारतीय फल अनुसंधान परियोजना एवं
सह निदेशक अनुसन्धान
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर, बिहार
मशहूर शाही लीची बाजार में लगभग 10 दिन के बाद आने को तैयार है। इस समय सबसे बड़ा प्रश्न ये है की इसकी तुड़ाई के समय क्या क्या सावधानी बरतने की आवश्यकता है। क्योंकि इसके फल तुड़ाई के तुरंत बाद से क्रमशः खराब होने लगते है। फल का गाढ़ा लाल रंग जो प्रमुख आकर्षण का केंद्र होता है, कुछ ही घंटे के बाद उसका रंग बदलने लगता है। इसको अधिक समय तक कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है, यह जानना अत्यावश्यक है।
लीची एक गैर-जलवायु (Non-climacteric) फल है और जब पेड़ पर फल पूरी तरह से पक जाते हैं तभी तुड़ाई की जाती है। तुड़ाई के समय फल पर रंग का विकास, फल के ऊपर बनी गाठों (ट्यूबरकल) का सपाट होना, छिलका का गुद्दे से आसानी से छोड़ देना और टीएसएस एवं अम्लता का अनुपात, फलों के सेट से परिपक्वता तक लिए गए दिनों की संख्या इत्यादि कारकों को भी ध्यान में रखा जाता है। हालांकि, कटाई के चरण को तय करने के लिए रंग विकास प्रमुख मानदंड है लेकिन अंतिम मानदंड नहीं है। फल को तोड़कर खाने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष पर पहुचना चाहिए। लीची में लाल रंग का रंग एंथोसायनिन पिगमेंट जैसे साइनाइंडिन-3 ग्लूकोसाइड, साइनाइडिन-3 गैलेक्टोसाइड, पेलार्गोनिडिन-3 ग्लूकोसाइड और पेलार्गोनिडिन-3, 5- डिग्लुकोसाइड के कारण से होता है। फल को हमेशा गुच्छों में शाखा के हिस्से और कुछ पत्तियों के साथ ही तोड़ा जाता है।तुड़ाई के समय चयनित गुच्छों की कटाई वांछनीय परिपक्वता अवस्था में पहुंचने पर करते है। फलों को सुबह जल्दी तोड़ लेना चाहिए जब तापमान और आर्द्रता अनुकूल हो जो फल की लंबी शेल्फ लाइफ देता है, अन्यथा फल के छिलकों का रंग तेज धुप एवं गर्मी की वजह से बहुत जल्दी ख़राब होने लगता है। फलों की तुड़ाई के समय फलों को हमेशा बैग में ही इकट्ठा करना चाहिए और जमीन पर उसे नहीं गिराने देना चाहिए। लीची के फलों की तुड़ाई के बाद फल को पहले ठंडा किया जाना चाहिए, जिससे तुड़ाई के समय की गर्मी निकल जाय उसके बाद उसकी पैकिंग करने से फल की शेल्फ लाइफ बढ़ती है। इसके अलावा फलों को दो-तीन घंटे के भीतर कोल्ड स्टोरेज में लाना चाहिए। फलों की उपज पेड़ की उम्र, कृषि-जलवायु की स्थिति और बाग के रखरखाव के अनुसार बदलती रहती है। आमतौर पर 14-16 साल पुराने पेड़ों से लगभग 80-120 किलो फल प्रति पेड़ प्राप्त होता है। हालांकि पूर्ण विकसित पेड़ से 160-200 किग्रा प्रति पेड़ की उपज प्राप्त की जा सकती है।
लीची की मशहूर शाही किस्म में फल लगने के 70-75 दिनों के बीच परिपक्व हो जाते है। परिपक्वता के समय फल का वजन लगभग 20 ग्राम होता है। हालांकि जलवायु कारक फूल आने के समय को प्रभावित करते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वे फलों के विकास या परिपक्वता को प्रभावित करें। खेती, उत्पादन क्षेत्र और स्थिति के आधार पर कटाई में लगभग पांच से आठ सप्ताह लगते हैं। परिपक्वता के उचित चरण में आने के बाद ही किस्मों की कटाई की जानी चाहिए। लीची की कटाई सुबह के समय या शाम में करनी चाहिए जब वातावरण का तापमान कम हो। गर्मी के मौसम में कटाई करने से पानी के नुकसान की दर में तेजी आ सकती है। लीची के फलों की कटाई के समय फलों का वजन 20-25 ग्राम होना चाहिए, रंग लाल, चीनी की मात्रा 15-17 प्रतिशत , TSS एवं अम्लता का अनुपात 60-70 तथा फल से छिलका आसानी से निकला चाहिए।
लीची के फल को लम्बे समय तक स्टोर नहीं किया जा सकता। तुड़ाई के बाद फलों को इनके रंग और आकार के अनुसार ग्रेडिंग करनी चहिए। लीची के हरे पत्तों को बिछाकर टोकरियों में इनकी पैकिंग करें। लीची के फलों को 1.5-2.0 डिग्री सैल्सियस तापमान और 85-90% नमी में भंडारित करना चाहिए। फलों को इस तरह 8-12 सप्ताह के लिए स्टोर किया जा सकता है, लेकिन ज्यादा बेहतर होगा की इसे ताजा ही बेचा जाय। जितना विलम्ब से बेचा जाएगा इसकी क्वालिटी उतनी ही प्रभावित होगी। इसकी पैकिंग के लिए 25- 35 किग्रा की लकड़ी याँ कागज़ के कार्टून प्रयोग में लाये जाते है।
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