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हर बार डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) खाद की किल्लत किसानों के लिए बड़ी समस्या बन जाती है। बाजार में इसकी उपलब्धता कम होने पर किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। लेकिन कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि कई अन्य उर्वरक भी डीएपी का बेहतर विकल्प बन सकते हैं। खासकर गेहूं और चना जैसी फसलों के लिए NPK मिश्रित उर्वरक और सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, NPK (नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम) मिश्रित उर्वरक का उपयोग करने से फसलों को संतुलित पोषण मिलता है। इसमें:
नाइट्रोजन - पत्तियों और तनों की ग्रोथ को बढ़ाता है।
फास्फोरस - जड़ों के विकास को मजबूत करता है।
पोटैशियम - फसल को सूखे और रोगों से लड़ने की क्षमता देता है।
गेहूं और चना की फसलों के लिए किसान NPK 12:32:16 का उपयोग कर सकते हैं, जिसमें 12% नाइट्रोजन, 32% फास्फोरस और 16% पोटैशियम होता है। इसके अलावा 10:26:26, 20:20:013 और 16:16:16 जैसे अन्य NPK उर्वरकों का भी उपयोग किया जा सकता है।
यदि मिट्टी में फास्फोरस की कमी हो तो सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) एक शानदार विकल्प हो सकता है। यह मिट्टी में फास्फोरस की पूर्ति करता है, जिससे जड़ें मजबूत होती हैं और फसल का उत्पादन बढ़ता है। गेहूं, चना और मक्का जैसी फसलों के लिए यह खाद बेहद उपयोगी साबित होती है। इसे अन्य उर्वरकों के साथ मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि पौधों को संतुलित पोषण मिल सके।
खरगोन कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जीएस कुलमी का कहना है कि उर्वरक पौधों के लिए भोजन का काम करते हैं, लेकिन इनका सही मात्रा में और संतुलित उपयोग ही फायदेमंद होता है। जरूरत से ज्यादा खाद का उपयोग करने से फसलों को नुकसान भी हो सकता है। इसलिए किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता के अनुसार उपयुक्त उर्वरक का चुनाव करना चाहिए।
यदि किसानों को डीएपी की कमी का सामना करना पड़ रहा है, तो वे NPK मिश्रित उर्वरक और सिंगल सुपर फास्फेट का उपयोग कर सकते हैं। ये न केवल डीएपी का अच्छा विकल्प हैं, बल्कि फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन भी बेहतर बनाते हैं। सही उर्वरक का चुनाव करके किसान अपनी फसलों से अधिक लाभ कमा सकते हैं।
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