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खेती-किसानी में लगातार बदलाव आ रहे हैं, और अब किसान पारंपरिक खेती छोड़कर व्यावसायिक और अधिक मुनाफे वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। उन्हीं में से एक है करेले की खेती, जो कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली साबित हो रही है। अगर किसान सही तकनीक अपनाएं, तो एक एकड़ में दो से ढाई लाख रुपये तक की कमाई की जा सकती है। आइए जानते हैं करेले की खेती का पूरा तरीका और इससे होने वाले लाभ।
करेले की
खेती की लागत और मुनाफा
करेले की खेती के लिए एक एकड़ खेत में करीब 60,000 रुपये की लागत आती है। इस लागत में बीज,
बांस,
डोरी,
पन्नी और मजदूरी का खर्च शामिल होता है। वहीं, फसल
से होने वाला मुनाफा 2.5 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।
बेहतर
पैदावार के लिए अपनाएं मल्चिंग विधि
करेले की खेती में मल्चिंग विधि (Mulching Method) अपनाई जाती है,
जिससे खेत की नमी बनी रहती है और खरपतवार कम उगते हैं। इस
तकनीक से फसल की पैदावार अच्छी होती है और कीट व रोगों का प्रकोप भी कम होता है, जिससे
उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होती है।
करेले की
खेती का तरीका
खेत की
जुताई और बेड बनाना:
सबसे पहले खेत की गहरी जुताई कर ली जाती है और उसके बाद
उसमें बेड बनाए जाते हैं।
पन्नी
बिछाना:
बेड्स पर प्लास्टिक मल्चिंग शीट (पन्नी) बिछाई जाती है, जिससे
मिट्टी की नमी बनी रहती है और खरपतवार कम होते हैं।
बीज बोना:
पन्नी में 1 से 1.5 फीट की दूरी पर छेद किए जाते हैं और उनमें करेले के बीज लगाए जाते हैं।
सिंचाई और
देखभाल:
बीज अंकुरित होने के बाद पौधों की सिंचाई की जाती है। जब
पौधे थोड़े बड़े हो जाते हैं,
तो खेत में बांस और डोरी का ढांचा बनाया जाता है, जिससे
पौधे सहारा लेकर ऊपर चढ़ सकें।
तोड़ाई और
बिक्री:
पौधे लगाने के 60-70 दिनों बाद फसल तैयार होने लगती है। करेले को हर दिन तोड़ा जा सकता है और यह
फसल लगभग तीन महीने तक उत्पादन देती है।
क्यों
फायदेमंद है करेले की खेती?
·
कम लागत,
अधिक मुनाफा: पारंपरिक फसलों के
मुकाबले करेले की खेती में ज्यादा मुनाफा होता है।
·
जलवायु के अनुसार अनुकूल:
करेले की फसल को अधिक देखभाल की जरूरत नहीं होती और यह अलग-अलग मौसम में उगाई जा
सकती है।
·
बाजार में अच्छी मांग:
करेले की बाजार में सालभर अच्छी मांग बनी रहती है, जिससे किसानों को सही
दाम मिल जाता है।
·
स्वास्थ्यवर्धक फसल:
करेले की मांग सिर्फ सब्जी के रूप में ही नहीं बल्कि औषधीय उपयोग के कारण भी अधिक
होती है।
यदि किसान धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों से हटकर करेले
की खेती को अपनाते हैं और मल्चिंग तकनीक जैसी आधुनिक विधियों का उपयोग करते हैं, तो
वे अच्छी पैदावार और अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। खेती के इस तरीके से किसानों की आय
में बढ़ोतरी हो सकती है और वे अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं।
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